टीपू सुल्तान जिन की तोपों से अंग्रेज़ भी कांपते थे

टीपू सुल्तान
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टीपू सुल्तान को इतिहास में एक महान योद्धा और एक विद्वान व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।
जिनका जन्म 20 नवंबर 1750 में कर्नाटक के देवनाहली में हुआ था। मैसूर के महान शासक हैदर अली टीपू सुल्तान के पिता थे।
टीपू सुल्तान की वीरता को देखते हुए उनके पिता हैदर अली ने उन्हें  शेर ए मैसूर का खिताब दिया था।
4 मई 1799 को अंग्रेजों से श्रीरंगापटनम की रक्षा करते हुए टीपू सुल्तान वीरता को प्राप्त हुए।

टीपू सुल्तान से जुड़ी कुछ रोचक बातें

लंदन के साइंस म्यूजियम में आज भी टीपू सुल्तान के रॉकेट रखे हुए हैं।  इन रॉकेटो को18 वीं सदी के अंत में अंग्रेज अपने साथ ले गए थे। यही कारण है कि टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइल मैन माना जाता है।

टीपू सुल्तान ने मात्र 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों से युद्ध लड़ा और इसे आसानी से जीता था। टीपू सुल्तान स्वयं को एक आम इंसान मानते थे और अपने को नागरिक  टीपू कहा करते थे।

टीपू सुल्तान को भारत का पहला फ्रीडम फाइटर भी माना जाता है क्योंकि वह भारत में अंग्रेज के खतरे को भांपते थे यही कारण है कि अंग्रेजों को भगाने के लिए उन्होंने अंग्रेजों के साथ चार युद्ध लड़े।

टीपू सुल्तान

टीपू सुल्तान की राजधानी का नाम श्रीरंगापटनम था। टीपू सुल्तान अंग्रेजों से अपने पिता की हार का बदला लेना चाहते थे उन्होंने अपने नेतृत्व से एक अच्छी सेना तैयार की और युद्ध में तोपों का इस्तेमाल करने पर बल दिया।   टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली ने प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध में 1766 में अंग्रेजों को धूल चटा दी।

1782 में हुए द्वितीय मैसूर युद्ध में भी अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा।अंग्रेज टीपू सुल्तान की शक्ति से पूरी तरह से वाकिफ से इसलिए  वे टीपू सुल्तान से संधि करना चाहते थे। इसीलिए दोनों पक्षों में 1784 इसवी में  मंगलौर की संधि हुई।

लेकिन 4 मई 1799 को अपनी राजधानी श्रीरंगापटनम की रक्षा करते हुए  टीपू सुल्तान युद्ध में  वीरगति को प्राप्त हुए।

पालक्काड  शहर में स्थित  किले को टीपू के किले के  नाम से जाना जाता है। इस किले का निर्माण 1766 ईस्वी में हुआ था और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत एक सुरक्षित इमारत के रूप में  घोषित किया गया है।

मैसूर में रेशम कीट पालन के व्यवसाय की शुरुआत भी टीपू सुल्तान नहीं की थी। इन्होंने बंगाल से   शहतूत के पेड़ लगाने सीखें और मैसूर में आकर 21 अलग-अलग जगहों पर ट्रेनिंग केंद्रों की शुरुआत की जिसमें रेशम कीट पालन के व्यवसाय के बारे में जानकारी दी जाते थी।

टीपू सुल्तान के नाम पर विवाद का कारण

बहुत सारे हिंदू संगठनों का मानना है कि टीपू सुल्तान धर्मनिरपेक्ष नहीं थे। इन संगठनों का मानना है कि टीपू सुल्तान एक निरंकुश शासक था और उसने जबरन लोगों का धर्म परिवर्तन कराया और बहुत सारे मंदिरों को भी करवाया इसीलिए उसे दक्षिण का औरंगजेब भी  कहा जाता है।

19वीं सदी में  ब्रिटेन के लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबार मैनुअल’ में टीपू सुल्तान के बारे में लिखा कि टीपू सुल्तान ने अपनी सेना की मदद से कालीकट में बहुत तबाही मचाई थी। टीपू ने बहुत सारे पुरुषों और महिलाओं को फांसी पर लटका दिया था। साथ ही इस किताब में टीपू सुल्तान पर मंदिर और चर्चों को तोड़ने का आरोप लगाया गया है।

1964 में प्रकाशित हुई एक किताब जिसका नाम था लाइव ऑफ टीपू सुल्तान में लिखा गया था कि  टीपू सुल्तान ने एक लाख हिंदुओं और 70000 ईसाइयों को जबरन मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया।

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