क्या समलैंगिकता एक बीमारी है ?

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प्रकृति में यह नियम है कि विपरीत लिंग के जीव एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं।
ऐसे जीवो को हेट्रोसेक्सुअल कहते हैं।

समलैंगिकता

लेकिन यदि पुरुष  पुरुष की तरफ और महिला  महिला की तरफ आकर्षित हो तो इस को ही समलैंगिकता  कहा जाता है।
ऐसे पुरुषों को गे और महिलाओं को लेस्बियन कहा जाता है।

समलैंगिकता
प्रकृति में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पुरुष और महिला दोनो की तरफ आकर्षित हो जाते हैं ऐसे लोगों को  बाईसेक्सुअल कहा जाता है।
उदाहरण के रूप में किसी को चाय पीना पसंद है और किसी को  कॉफी लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जिन्हें चाय और  कॉफी दोनों पीना पसंद होता है।

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तो जैसा कि हम बता चुके हैं कि यह प्रकृति का नियम है कि जीव विपरीत लिंग की तरफ आकर्षित होता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति समलैंगिक होता है  तो कई बार समाज में उसे  घृणा की दृष्टि से देखा जाता है।

समलैंगिकता का कारण

विज्ञान के अनुसार समलैंगिकता  कई लोगों में जन्म से ही होती है। इसमें उस इंसान के माता-पिता या उसका कोई दोष नहीं होता।
समलैंगिकता का लक्षण ऐसे व्यक्तियों में जन्म से होने के कारण इनके गुणों को बदलना काफी मुश्किल है।
कई बार मानसिक बीमारी के कारण भी व्यक्ति में समलैंगिकता के गुण आ जाते हैं। और ऐसा भी संभव है कि जब बीमारी ठीक हो व्यक्ति हेट्रोसेक्सुअल हो जाए।

विश्व के कुछ देश जैसे अमेरिका, नीदरलैंड, बेल्जियम, नार्वे, दक्षिण ब्रिटेन और   स्पेन में समलैंगिक विवाह को मान्यता दी गई है। भारत में समलैंगिक विवाह को मान्यता प्राप्त नहीं है लेकिन इसे अपराध नहीं माना जाता।

मनुष्य के अलावा वैज्ञानिक  1500 अन्य प्रजातियों में भी  समलैंगिकता का गुण  होने की पुष्टि कर चुके हैं।
आप प्रश्न यह उठता है कि क्या समलैंगिकता का इलाज है तो इसका उत्तर है नहीं क्योंकि समलैंगिकता एक बीमारी नहीं है।

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