Global Warming-दुनिया के लिए खतरा

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Global Warming आज पूरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके कारण आने वाले समय में पूरे विश्व को बहुत ही भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग से  सुखा, बाढ़, मौसम में असामान्य परिवर्तन जैसी घटनाओं एक होने की संभावना बढ़ जाएगी।

तो आइए जानते हैं क्या है ग्लोबल वार्मिंग और चर्चा करते हैं इसके कारण और इससे बचने के उपायों के बारे में।

Global Warming क्या है (What is Global Warming)

ग्लोबल वार्मिंग का  अर्थ है पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होना यानी  पृथ्वी का  गर्म होना। ग्लोबल वार्मिंग इतनी बड़ी समस्या है कि इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं यदि पृथ्वी का तापमान आने वाले 20 सालों में इसी तरह से बढ़ता रहा तो समुंदर के किनारे अधिकतर देश बाढ़ की वजह से नष्ट हो जाएंगे।

 

वैज्ञानिकों के अनुसार भी ग्लोबल वार्मिंग को इस समय विश्व की सबसे बड़ी समस्या माना जा रहा है और यह समस्या तीसरे विश्वयुद्ध से किसी प्रकार से कम नहीं है।

Global Warming का कारण (Cause of Global Warming)

किसी भी समस्या को हल करने में पहला कदम समस्या के कारण की पहचान करना है। इसलिए, हमें पहले ग्लोबल वार्मिंग के कारणों को समझने की आवश्यकता है जो हमें इसे हल करने में आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

ग्लोबल वार्मिंग के कई कारण है लेकिन इनमें से सबसे प्रमुख मनुष्य की  पर्यावरण के साथ छेड़खानी है। इसके अलावा और भी बहुत कारण है आइए इनके बारे में चर्चा करते हैं।

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 ग्रीन हाउस गैसे(Green house gases)

ग्रीन हाउस गैसें वह कैसे हैं जिनके द्वारा वायुमंडल गर्म होता है। इनमें प्रमुख है कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन इत्यादि। ग्रीन गैसों द्वारा पृथ्वी के वायुमंडल का गर्म होना ग्रीन हाउस इफेक्ट कहलाता है। ग्रीन हाउस गैसों के अलावा जलवाष्प भी ग्रीन हाउस इफेक्ट में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

सभी ग्रीन हाउस गैसों में से कार्बन डाइऑक्साइड  ग्रीन हाउस इफेक्ट के लिए  सबसे अधिक उत्तरदाई है। यह गैस मानव  सांस लेने के दौरान छोड़ता है साथ ही कार्बनिक पदार्थों को जलाने से भी यह गैस उत्पन्न होती है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के अधिक होने के कारण पृथ्वी का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है।

ग्रीन हाउस गैसों की को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न  प्रयास भी किए गए हैं। 1988 में इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज का गठन किया गया था और सन 2007 में इस संस्था को शांति का नोबेल प्राइज भी मिला था।

यह संस्था विश्व में जलवायु परिवर्तन से  जुड़ी सभी घटनाओं पर नजर रखता है। इस संस्था के अनुसार ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए मानव जाति पूरी तरह से जिम्मेदार है। इस संस्था के अनुसार  ग्लोबल वार्मिंग में 90 परसेंट योगदान मानव जाति का है।

आज के युग में  स्वच्छ पर्यावरण हर मनुष्य की  मूलभूत आवश्यकता  है। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दशकों में पृथ्वी का तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ेगा । इसके परिणाम बहुत ही भयंकर होंगे जिसका सीधा प्रभाव जीव जंतु और मनुष्य पर पड़ेगा। सभी को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

नीचे दी गई सारणी में विभिन्न स्रोतों से ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन जानकारी दी गई है।

 

ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन

 

पॉवर स्टेशन से -21.3 प्रतिशत

 

इंडस्ट्री से-16.8 प्रतिशत

 

यातायात और गाड़ियों से-14 प्रतिशत

 

खेती-किसानी के उत्पादों से-12.5 प्रतिशत

 

जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से-11.3 प्रतिशत

 

रिहायशी क्षेत्रों से-10.33 प्रतिशत

 

बॉयोमास जलने से-10 प्रतिशत

 

कचरा जलाने से-3.4 प्रतिशत

 

इसके अलावा, ज्वालामुखी विस्फोट भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार हैं। यह कहना है कि, इन विस्फोटों से कार्बन डाइऑक्साइड के टन निकलते हैं जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करते हैं।

उसके बाद, ऑटोमोबाइल और जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, खनन और पशु पालन जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक हैं। सबसे आम मुद्दों में से एक है जो तेजी से हो रहा है वनों की कटाई।

संयुक्त राष्ट्र संघ में Global Warming पर चर्चा(Discussion in United Nation)

सन 2015 में संयुक्त राष्ट्र में भी ग्लोबल वार्मिंग के ऊपर चर्चा की गई। इसमें जलवायु संधि कराने पर विचार किया गया। इस वार्ता के दौरान 195 देशों  ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा की।  इस वार्ता में चर्चा की गई कि ग्लोबल वार्मिंग  के कारण बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ गया है किसके कारण समुंदर के किनारे बसे छोटे देशों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस चर्चा में सभी देशों से अपने-अपने देशों में ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदाई गैसों के उपयोग  को कम करने की  अपील की गई।

ग्लोबल वार्मिंग के खतरनाक परिणाम(Harmful effects of global warming)

वैज्ञानिकों के अनुसार अगर हमने ग्लोबल  वार्मिंग पर काबू नहीं पाया तो 21वी सदी में पृथ्वी का तापमान लगभग 8 डिग्री तक बढ़ जाएगा।  यदि ऐसा हुआ तो ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघल जाएगी और  समुंदर के किनारे बसे अधिकतर देश नष्ट हो जाएंगे।   इसके अलावा विश्व के कई देशों में सूखे की समस्या  उत्पन्न हो जाएगी और और मानव जाति का पेट भरने के लिए अनाज उत्पादन में कमी आ जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो विश्व भर में भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

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ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय(How to stop global warming)

यदि मनुष्य को ग्लोबल वार्मिंग के भयंकर परिणामों से बचना है तो उसे मुख्य रूप से ग्रीन हाउस गैसों के  उपयोग पर पाबंदी लगानी होगी। ग्रीन हाउस गैसें मुख्य रूप से  एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और अन्य  ठंडा करने वाले यंत्रों में पाई जाती है।

इसके साथ-साथ वाहनों से निकलने वाले धुएं में भी ग्रीन हाउस गैसें पाई जाती है। इससे बचने के लिए विश्व के सभी देशों को अपने अपने देशों में विद्युत से चलने वाले वाहनों पर जोर देना चाहिए।

ग्रीन हाउस गैसों में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड है इसकी मात्रा को संतुलित करने के लिए  सभी व्यक्तियों का यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह अधिक से अधिक वृक्ष लगाएं।

ईंधन के रूप में ऊर्जा के  नवीनीकरण स्रोत जैसे सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा आदि का  प्रयोग करके   जीवाश्म ईंधनों से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों पर नियंत्रित किया जा सकता है।

 

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