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How we can travel in time(समय में यात्रा कैसे की जा सकती है)

टाइम ट्रेवल यानी समय में यात्रा कर पाना यह विषय विज्ञान के क्षेत्र में हमेशा ही उत्सुकता का विषय रहा है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति ने कभी ना कभी यह जरूर सोचा होगा कि काश हम अपने भूतकाल की कुछ घटनाओं को बदल पाते या निकट भविष्य में क्या होने वाला है ? यह जान पाते।लेकिन यह सभी चीजें बिना समय यात्रा के संभव नहीं है।लेकिन क्या समय यात्रा वास्तव में संभव है? आज हम  “How we can travel in time(समय में यात्रा कैसे की जा सकती है)”  इसी विषय पर चर्चा करेंगे।
समय यात्रा का जिक्र हमारी पौराणिक कथाओं में भी मिलता है।हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी देवता आसानी से किसी भी काल और किसी भी समय में यात्रा कर सकते थे।लेकिन मशीन द्वारा समय यात्रा की कल्पना सबसे पहले 1895 ईसवी में ‘जॉर्ज वेल्स’ ने की थी ।उन्होंने अपने उपन्यास ‘द टाइम मशीन’ में एक ऐसी असाधारण मशीन की कल्पना की है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने भविष्य काल या भूतकाल में आसानी से यात्रा कर सकता है।

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विज्ञान और समय यात्रा

अब सवाल ये उठता है क्या विज्ञान के अनुसार समय यात्रा संभव है ? तो इसका उत्तर है बिल्कुल ! जी हां, विज्ञान के अनुसार समय यात्रा संभव है ।हालांकि आरंभ में ऐसा माना जाता था कि समय यात्रा केवल साइंस फिक्शन है और यह संभव नहीं है। लेकिन जब महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइस्टाइन सापेक्षता का सिधान्त(थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी) दिया उसके बाद समय यात्रा की संभावनाओं को मान लिया गया है।

अब थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी से समय यात्रा कैसे संभव है यह जानने से पहले दोस्तों मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाने की कोशिश करता हूं।मान लो आप और आप का मित्र दोनों ही एक फ़िल्म देख रहे हैं।आप फ़िल्म को नॉर्मल रेट से देख रहे हो लेकिन आपका मित्र फ़िल्म को फ़ास्ट फारवर्ड कर के देख रहा है। तो आप का मित्र आप से पहले फ़िल्म खत्म कर देगा और उसे फ़िल्म के अंत का पता आप से पहले चल जाएगा। अब इस उदाहरण में आपके लिए मूवी नॉर्मल रेट से चल रही है लेकिन आपके मित्र के लिए मूवी तेज चल रही है ।यही बात थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी कहती है कि समय सभी के लिए एक समान नही होता।

पहले हम मानते थे कि समय सभी स्थानों पर एक ही समान घटित होता है। यानी कि जो समय पृथ्वी पर होगा वही समय चांद पर और किसी अन्य ग्रह पर होगा। लेकिन थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के अनुसार समय नियत ना होकर समय सापेक्ष है यानी ऐसा संभव है कि कहीं पर समय तेजी से चलें और कहीं पर समय आराम से व्यतीत हो।
थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के अनुसार समय की गति को दो चीजें प्रभावित करती है पहला तो गुरुत्वाकर्षण बल और दूसरा वस्तु की गति।
दोनों को एक-एक करके समझने की कोशिश करते हैं।

गुरुत्वाकर्षण बल

सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार यदि किसी स्थान पर ग्रेविटी अधिक होगी तो वहां पर समय आराम से चलेगा और इसके विपरीत यदि किसी स्थान पर ग्रेविटी कम होगी तो वहां पर समय तेजी से व्यतीत होगा। अर्थात यदि हम ऐसी जगह पर जाएं जहां पर गुरुत्वाकर्षण बल काफी ज्यादा हो तो हमारे लिए समय धीमा हो जाएगा और इसके विपरीत हम किसी ऐसी जगह पर जाएं जहां पर गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम हो तो हमारे लिए समय तेज हो जाएगा।


इस बात को एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं।
इस ब्रह्मांड में हम जितने भी वस्तुओं के बारे में जानते हैं उन सब में से ‘ब्लैक होल’ का गुरुत्वाकर्षण सबसे अधिक होता है। तो यदि ऐसे में कोई व्यक्ति अंतरिक्ष यान द्वारा ब्लैक होल के काफी करीब चला जाए तो गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होने के कारण उसके लिए समय काफी आराम से व्यतीत होगा और उसकी तुलना में पृथ्वी पर समय काफी तेजी से व्यतीत होगा।

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मान लीजिए कि वह व्यक्ति ब्लैक होल के करीब लगभग एक घंटे जितना समय व्यतीत करता है तो ऐसी संभावनाएं है कि पृथ्वी पर इतने ही समय में कई साल गुजर जाए।
इसका मतलब यह है कि यदि हम ऐसी मशीन का निर्माण कर सकें जिससे हम गुरुत्वाकर्षण बल को नियंत्रित कर सकें अर्थात कम या ज्यादा कर सकें। तो हम समय को तेज या धीमा कर पाएंगे लेकिन वर्तमान में तो हमारे पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे हम ग्रेविटी को नियंत्रित करने वाली मशीन का निर्माण कर सकें लेकिन भविष्य में इसकी संभावनाएं हैं।

वस्तु की गति

समय की गति को जो दूसरी चीज प्रभावित करती है वह है वस्तु की गति।


सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार यदि किसी वस्तु की गति बढ़ा दी जाए तो उसके लिए समय धीमा हो जाता है। और यदि वस्तु की गति प्रकाश की गति के बिल्कुल बराबर हो जाए तो उसके लिए समय रुक जाएगा अर्थात उसके लिए समय व्यतीत ही नहीं होगा। लेकिन हम जानते हैं कि अभी तक कोई भी वस्तु प्रकाश की गति से यात्रा नहीं कर सकती।
अब ऐसा क्यों है यह जानने की कोशिश करते हैं। सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार द्रव्यमान को ऊर्जा में बदला जा सकता है। हम निम्नलिखित सूत्र की मदद से द्रव्यमान को ऊर्जा में बदल सकते हैं
E = mc2

टाइम मशीन का निर्माण क्यों नहीं हो पाया है

सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार जैसे ही हम किसी वस्तु की गति बढ़ाते हैं तो उसका द्रव्यमान भी बढ़ जाता है। यदि हम किसी वस्तु की गति प्रकाश की गति की 90% कर दें तो उसका द्रव्यमान दोगुना हो जाएगा और यदि हम उस वस्तु की गति प्रकाश की गति के 99% के बराबर कर दें तो उसका द्रव्यमान 8 से 10 गुना बढ़ जाएगा। लेकिन यदि वस्तु की गति प्रकाश की गति के बिल्कुल बराबर हो जाए तो उसका द्रव्यमान अनंत हो जाएगा।

अब समस्या यह है कि अनंत द्रव्यमान की वस्तु को गति कराने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता भी अनंत ही होगी। लेकिन हमारे पास अभी तक ऊर्जा का ऐसा कोई स्रोत नहीं है कि जिससे हम इतनी अधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकें। ऐसे में हम अगर ऐसी मशीन का निर्माण कर भी लें जिस की गति प्रकाश की गति के लगभग बराबर हो तो उसको चलाने के लिए जो ऊर्जा चाहिए वह हमारे पास उपलब्ध नहीं है।

इस बात का प्रमाण कि वस्तु की गति बढ़ाने से उसका द्रव्यमान भी बढ़ता है हमें ‘हैड्रोन कोलाइडर’ से भी मिलता है। हैड्रोन कोलाइडर एक ऐसी युक्ति है जिसमें प्रोटोन की गति बढ़ाकर प्रकाश की गति के लगभग बराबर कर दी जाती है। लेकिन जैसे-जैसे हम प्रोटॉन की गति बढ़ाते हैं उसका द्रव्यमान भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि प्रोटॉन की गति को बढ़ाने के लिए हमें हैड्रोन कोलाइडर के अंदर काफी ज्यादा ऊर्जा देनी पड़ती है। लेकिन प्रोटोन का आकार काफी ज्यादा छोटा होता है। इतने छोटे कण को गति कराने के लिए भी हमें काफी ज्यादा उर्जा देनी पड़ती है। तो इस हिसाब से अगर हम कोई मशीन बनाएं तो मशीन का आकार प्रोटोन की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ा होगा। और इतनी बड़ी मशीन को प्रकाश की गति से चलाने के लिए हमें इतनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी जितना हमारा सूर्य पूरे जीवन काल में उत्पन्न करता है।

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यही कारण है कि वैज्ञानिक अभी तक टाइम मशीन का निर्माण नहीं कर पाए हैं क्योंकि उसको चलाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी। तो अगर भविष्य में हमें ऊर्जा का कोई ऐसा स्रोत मिल जाता है तो यह भी संभव है कि वैज्ञानिक टाइम मशीन बना ले। लेकिन तब तक तो हम केवल समय यात्रा की कल्पना ही कर सकते हैं वास्तव में समय यात्रा करना वर्तमान में तो संभव नहीं है लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में इसकी संभावनाएं हैं।

तो दोस्तों ये था How we can travel in time(समय में यात्रा कैसे की जा सकती है )  के बारे में सम्पूर्ण  जानकरी आशा है  आप को  पसंद  आई  होगी ।आप हमें कमेंट्स के माध्यम से अपने सुझाव दे सकते है।

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