Hyperloop fastest Mode of transport (हाइपरलूप क्या है)

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What is Hyperloop-हाइपरलूप क्या है

Hyperloop यातायात का एक साधन है जिसके माध्यम से व्यक्ति और सामान को एक जगह से दूसरी जगह पर बहुत तेजी से पहुंचाया जा सकता है।
Hyperloop is a means of traffic through which people and goods can be transported from one place to another very fast.
परिवहन के क्षेत्र में  हाइपरलूप एक नई क्रांति की शुरुआत है और इसे परिवहन का पांचवा आयाम भी माना जा रहा है। हाइपरलूप का कंसेप्ट एलन मस्क ने दिया है जो इस समय दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं।
इस तकनीक को हाइपरलूप इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें परिवहन एक रूप के माध्यम से होता है। हाइपरलूप तकनीक में परिवहन की गति बहुत ज्यादा होती है इसलिए इस तकनीक  के पूरी तरह विकास के बाद अधिक दूरी को भी बहुत कम समय में तय किया जा सकेगा।
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Hyperloop की कार्यप्रणाली (Working of hyperloop)

इस तकनीक में विशेष प्रकार के पॉट्स का प्रयोग किया जाता है जिनमें यात्रियों या सामान को लोड करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से भेजा जा सकता है। इन पॉट्स को बड़े-बड़े पारदर्शी पाइपों में से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। इन बड़े-बड़े पारदर्शी पाइपों को ही loop कहते हैं।
इस तकनीक में पॉट्स की गति बढ़ाने के लिए दो बातों पर ध्यान दिया जाता है।
पहला लूप  के अंदर हवा बहुत कम रखी जाती है जिससे  जिससे पॉट्स काफी तेजी से गति करते हैं। क्योंकि जब  कोई वस्तु गति करती है तो हवा उसका विरोध करती है। इसीलिए लूप के अंदर हवा कम कर दी जाती है ताकि हवा गति का विरोध ना कर पाए।
दूसरा लूप के अंदर पॉट्स को  चुंबकीय प्रभाव  की सहायता से जमीन से  कुछ ऊपर उठा दिया जाता है  ताकि घर्षण कब हो जाए इससे भी पॉट्स की गति  बढ़ जाती है।
इस प्रकार Hyperloop तकनीक में इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन  यानी विद्युत प्रणोदन  विधि द्वारा  पॉट्स को कम वायुदाब वाली पारदर्शी ट्यूब के अंदर से बहुत तेज गति से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है।  इस तकनीक में हवाई जहाज की गति से भी तेज गति प्राप्त की जा सकती है। हाइपरलूप तकनीक में   1000 से लेकर 1300 किलोमीटर प्रति घंटा तक की  गति प्राप्त की जा सकती है।
इस तकनीक में परिवहन लूप के अंदर होता है इसलिए खराब मौसम का परिवहन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही इस तकनीक में बिना ड्राइवर की मदद से  पॉट्स को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजा जा सकता है।
इस विधि में इंधन को जलाकर ऊर्जा प्राप्त नहीं की जाती  इसलिए हाइपरलूप तकनीक में वायु प्रदूषण भी नहीं होता।
हाइपरलूप तकनीक में परिवहन  वर्तमान में तेज गति से चल रही ट्रेनों से लगभग 3 गुना तेजी से किया जा सकता है।
इस तकनीक में पोड को ऑन डिमांड चलाया जाता है आप कभी भी यात्रा शुरू कर सकते हैं और बिना रुके अपने  लक्ष्य पर आसानी से पहुंच सकते हैं।
यह तकनीक अन्य  तेज गति से चलने वाली ट्रेनों से कम खर्चीली है।

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Hyperloop तकनीक में चुनौतियां (Challenges for Hyperloop)

हाइपरलूप  तकनीक को लागू करने में बहुत सारी चुनौतियां हैं।
इस विधि में परिवहन बहुत तेज गति से होता है इसलिए इमरजेंसी ब्रेक लगाने की समस्या पैदा हो सकती है और यात्रियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि इतनी तेज गति से परिवहन के मामले में सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा।
लूप के अंदर हवा कम होने के कारण  और इस लूप का काफी संकरा होने के कारण यात्रियों को इसके अंदर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वाहनों को घुमावदार रास्ते पर चलाने के लिए टकराव का खतरा बना रहेगा।
इस तकनीक को कार्य में लाने के लिए  इसकी आरंभिक लागत काफी ज्यादा है।

भारत में Hyperloop की स्थिति(Hyperloop status in India)

भारत में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई से पुणे के बीच हाइपरलूप तकनीक को आरंभ करने की अनुमति दे दी है। आरंभ में मुंबई और पुणे के बीच में 118 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए हाइपरलूप तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लगभग ₹700000000 निवेश किए गए हैं और इसे पूरा होने में लगभग 7 वर्ष का समय लगेगा।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में लगभग 5000 करोड रुपए की लागत से एक पायलट प्रोजेक्ट बनाया जाएगा जिसमें लगभग 11.8  किलोमीटर की दूरी तय करके देखी जाएगी इसके सफल होने के बाद ही मुख्य परियोजना को शुरू किया जाएगा।
वर्तमान में मुंबई और पुणे के बीच में बहुत अधिक    यात्री सफर करते हैं। 2027 के अंत तक इन यात्रियों की संख्या लगभग 8 करोड हो जाने की संभावना है इसलिए इस क्षेत्र को सबसे पहले इस तकनीक के लिए चुना गया है।
वर्तमान में मुंबई और पुणे के बीच की दूरी तय करने में लगभग ढाई घंटे का समय लगता है ।हाइपरलूप तकनीक के विकास के बाद यह दूरी लगभग 25 मिनट में तय की जा सकेगी।
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी वर्जन हाइपरलूप नामक कंपनी को दी गई है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार ने वर्जिन hyperloop ग्रुप को लगभग 7 साल का समय दिया है।
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अन्य देशों में Hyperloop की स्थिति (Hyperloop status in other countries)

दुनिया के बहुत सारे देशों ने Hyperloop प्रणाली को  अपनाने की इच्छा जताई है। अमेरिका सऊदी अरब और कनाडा कुछ ऐसे देश है जिसमें इस तकनीक को आरंभ किया जाएगा। मुंबई और अबू धाबी के बीच में भी हाइपरलूप तकनीक द्वारा परिवहन के बारे में चर्चा की जा रही है।
हाल ही में अमेरिका के लास वेगास में वर्जिन हाइपरलूप का सफल यात्री परीक्षण किया गया। इस परीक्षण को वर्जिन ग्रुप ने किया है और इसके  साथ ही  वर्जिन ग्रुप हाइपरलूप तकनीक में यात्रियों का परीक्षण करने वाली पहली कंपनी बन गई है।
Hyperloop तकनीक को  भविष्य की तकनीक माना जा रहा है और ऐसा अनुमान है कि आने वाले 30 वर्षों में इस तकनीक की मदद से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 36000 टन की कमी की जा सकेगी।
तो हम कह सकते है कि hyperloop तकनीक के पूरी तरह विकसित होने के बाद यातायात के अंदर एक नई क्रांति का संचार होगा।

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