LiFi Future of Internet Hindi

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LiFi क्या है?

LiFi डाटा भेजने की एक वायरलेस तकनीक है। इसके माध्यम से डाटा को बहुत तेज गति से ट्रांसमिट किया जा सकता है।
इस तकनीक में डाटा को भेचने के लिए  विजिबल लाइट का प्रयोग किया जाता है। LiFi  की फुल फॉर्म Light Fidelity है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा गति प्रकाश की है इसलिए इस तकनीक के माध्यम से डाटा को लगभग 225 जीबी पर सेकंड की गति  से भेजा जा सकता है।  इसमें डाटा भेजने की गति WiFi तकनीक से लगभग 1000 गुना ज्यादा होती है।
इस तकनीक का यह एक और फायदा है कि जब भी  इससे आप इंटरनेट सेवा का प्रयोग करोगे आपको एक प्रकाश वाला यंत्र चाहिए जिसे हम lifi  बल्ब कह सकते हैं।यानी इस यंत्र से आपके कमरे में उजाला भी होगा और आपको इंटरनेट सेवा का फायदा भी।
अब सवाल यह उठता है कि यह तकनीक काम कैसे  करती है।
LiFi Technology
इस तकनीक में तीन  कंपोनेंट्स का यूज किया जाता है।
लैंप ड्राइवर
एलइडी लैंप
फोटो डिटेक्टर
तीनों का यूज करने के लिए आपको एक इंटरनेट कनेक्शन भी चाहिए। इन तीनों कंपोनेंट की मदद से लाइट के माध्यम से डाटा ट्रांसमिशन होता है।

कार्यप्रणाली

डाटा संचरण के लिए इंटरनेट का कनेक्शन लैप ड्राइवर के साथ कर दिया जाता है। इसके बाद लैब ड्राइवर से तार की मदद से जानकारी को एलईडी  बल्ब में भेजा जाता है।
एलईडी बल्ब के साथ लाईट डिटेक्टर लगा होता है जो लाइट की इंटेंसिटी में होने वाले बदलाव को पहचानता है।
इसके बाद फोटोडिटेकटर प्रकाश की तरंगों में आने वाले डाटा को बाइनरी रूप में बदल देता है।
और इस डाटा को आप के कंप्यूटर या मोबाइल पर भेज दिया जाता है। इस प्रकार से आपको  उच्च गति से  डाटा प्राप्त होता है।

ब्लू व्हेल के बारे में हैरान करने वाले तथ्य

इस तकनीक में डाटा को दोनों दिशाओं में भेजा जा सकता है।
जिस प्रकार से डाटा लैंप ड्राइवर से एलईडी बल्ब और उसके बाद हमारे डिवाइस में पहुंचता है वैसे हि डाटा को हमारे डिवाइस से एलइडी बल्ब और इसके बाद लैंप ड्राइवर के माध्यम से  वापिस भी भेजा जा सकता है ।

इतिहास

LiFi  का जनक  प्रोफेसर Harald Haas  को माना जाता है। Harald Haas का मानना है कि प्रकाश छोटे-छोटे कण फोटोन से मिलकर बना होता है इन के माध्यम से डाटा को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजा जा सकता है। प्रकाश तरंगों द्वारा डाटा के संचरण को वीएलसी कहा जाता है।
प्रोफेसर Harald Haas  ने दो साल तक डी लाइट प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद 2011 में टेड ग्लोबल टॉक में  पहली बार इस तकनीक का प्रदर्शन किया था।

LiFi के फायदे

इस तकनीक से डाटा भेजने के लिए विशेष प्रकार के एलईडी बल्ब का प्रयोग किया जाता है जिनकी कीमत काफी कम होती है यानी कि यह एक  डेटा संचरण की सस्ती तकनीक है।
इस तकनीक में डाटा संचरण के लिए प्रकाश का प्रयोग किया जाता है यानी जहां प्रकाश हो वहां डाटा भेजा जा सकता है।
इस तकनीक में आपका डाटा ज्यादा उचित रहेगा क्योंकि लाइट आपकी घर की दीवारों को पार नहीं कर सकती इसलिए कोई भी बाहर का व्यक्ति आपका इंटरनेट यूज नहीं कर सकता।

नुकसान

बिना प्रकाश के इस तकनीक  का प्रयोग नहीं किया जा सकता ।
सूर्य के प्रकाश की वजह से  इस तकनीक द्वारा डाटा के  संचरण में दिक्कत आ सकती है।
हालांकि इस तकनीक की कुछ लिमिटेशंस है लेकिन फिर भी इसे इंटरनेट का भविष्य माना जा रहा है।

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